अयोध्या । अयोध्या में मां नन्दा महिला रामलीला मांगल योग समिति की ओर से रामलीला का मंचन किया जा रहा है। इसके सभी पात्र महिलाएं हैं। इस महिला रामायण को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आ रहे हैं। दुनियाभर में कई तरह की रामलीला के बारे में सबने सुना होगा। कभी आपने ऐसा सुना है की रामलीला में ऐसे भी पात्र होते हैं जो सिर्फ महिलाएं ही होती हैं। सुनने में यकीन न आए लेकिन यह हकीकत है। हकीकत इस बात को लेकर है कि अयोध्या में एक ऐसी रामलीला हो रही है जिसमें जितने भी कलाकार हैं। सभी महिलाएं हैं। चाहे रामलीला के पुरुष पात्र हो या वह पात्र महिलाएं हों। सभी महिलाएं ही हैं। अयोध्या में मां नन्दा महिला रामलीला मांगल योग समिति की ओर से महिला रामलीला का मंचन हो रहा है।
इस रामलीला को लेकर उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग में टीचर जयलक्ष्मी गिल्डयाल ने बताया कि वह दशरथ का रोल निभा रही हैं। यह एक ऐसा रोल है जो की बेहद ही कठिन है। उन्होंने कहा कि कठिन इस नाते की एक समय दशरथ को इस बात का वियोग था कि उन्हें पुत्र नहीं हो रहा है। उस समय वह यज्ञ करते हैं। उसे पुत्र प्राप्त होता है।जब उनके अच्छे दिन आते हैं तो उनका पुत्र वनवास चला जाता है। उन्होंने कहा कि एक ही वक्त में 2-3 कैरेक्टर को प्ले करना पड़ता है। जो कि अपने आप में एक चुनौती पूर्ण विषय है। उन्होंने कहा कि भगवान की कृपा है कि वह इस तरह का कार्य कर पा रही हैं। उत्तराखंड की लक्ष्मी रावत चमोली में हेल्थ कॉर्डिनेटर के पोस्ट पर हैं।
वह बताती हैं कि साल 2015 से यह रामलीला हो रही है। उत्तराखंड के विभिन्न जिलों से महिलाओं का यह समूह है। रामलीला के मंचन में सरकारी और गैर सरकारी सभी महिलाएं परफॉर्म करती हैं। लक्ष्मी ने बताया कि इसमें 35 साल से लेकर 80 साल तक की महिलाएं हैं जो इसमें परफॉर्म कर रही हैं। उत्तराखंड कै गैड़सन से तनुजा मैथानी पेशे से शिक्षक हैं। तनुजा ने बताया कि अयोध्या में यह रामलीला जल्दी खत्म होने वाली है। जैसे ही यह रामलीला अयोध्या में खत्म होगी। उसके बाद भगवान शिव की नगरी काशी से इस रामलीला का मंचन होगा। हालांकि वहां चुनौती कुछ और है। वहां 3 दिनों में इस रामलीला के मंचन को पूरा करना है। महिलाओं ने बताया कि उनका उद्देश्य पूरे देश में रामायण के माध्यम से लोगों को जागृत करना है।
सुमती सिंह ने बताया कि महिला रामायण के माध्यम से हम नारियों में योग और स्वस्थ रहने का प्रचार प्रसार भी कर रहे हैं। रामायण हमें बहुत कुछ सिखाती है। रामायण हमें मर्यादा सिखाती है तो रामायण हमें स्वस्थ रहना भी सिखाती है। स्वस्थ्य शरीर में स्वस्थ मन और स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है। सभी विकारों को दूर करना रामायण हमें सिखाती है। उन्होंने कहा कि नारी सशक्तिकरण का दूसरा नाम महिला रामायण है।