इन्दौर / हर अच्छे-बुरे कर्म का फल मिलता ही है, ऐसा सनातन धर्म कहता है । गत जन्म के कर्म का लेन-देन हिसाब पूर्ण करने के लिए मनुष्य का बार बार जन्म होता है । इसलिए जीवन की शारीरिक तथा मानसिक समस्याओं के पीछे जो आध्यात्मिक कारण है, उसके निवारण के लिए कुलदेवी की उपासना आवश्यक है । गतजन्म के बुरे कर्म, हमारे अंदर के दुर्गुण एवं अहंकार यही जीवन के दु:ख एवं तनाव का कारण है । सनातन धर्म एक अद्भूत विज्ञान है । शास्त्र के अनुसार आचरण कर हम उसकी अनुभूति ले सकते है, ऐसा प्रतिपादन श्रीरामजी ने किया । वे साईनाथ कॉलनी स्थित श्रीराम मंदिर में सनातन संस्था की ओर से आयोजित ‘तनावमुक्त जीवन हेतु अध्यात्म’ इस विषय पर उपस्थितों को संबोधित कर रहे थे ।
कार्यक्रम में आनंदजी ने कहा की, सनातन धर्म के सिद्धांतों को समझने से मेरे जीवन में ही ऐसा क्यों ? यह हमारा तनाव दूर हो जाएगा । आज पाठशालाओं में अर्थप्राप्ती का प्रशिक्षण तो दिया जाता है, पर तनावमुक्त जीवन कैसे जिए, यह नहीं सीखाया जाता । इस कारण आज भौतिक प्रगती के उपरांत भी मनुष्य तनाव एवं दु:ख में है । तनाव कम करने के लिए स्वयं की कमियों का स्वीकार करना चाहिए । हमारी चिंताओं के विषय में मनमुक्तता से बात करने के साथ ही उपासना के द्वारा आत्मबल बढाना आवश्यक है ।
आत्मबल केवल उपासना से ही बढता है । हर यशस्वी व्यक्ती जीवन में आत्मबल वृद्धी के लिए साधना करता ही है । हम भी नित्य जीवन में यदि कुलदेवी की उपासना को स्थान दे, तो हम निश्चितरूप से आनंदमय जीवनयापन कर सकते है । कार्यक्रम स्थल पर लगाईं गई अध्यात्म विषयक प्रदर्शनी का भी जिज्ञासूओं ने लाभ लिया । आयोजन में स्थानीय चार्टड अकाउंटट निरंजन पुरंदरे एवं श्री साईंनाथ धार्मिक, शैक्षणिक एवं पारमार्थिक ट्रस्ट की अध्यक्षा श्रीमती सविता शिंदे का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ। श्रीमती मातंगी तिवारी ने मंच संचालन किया ।