उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के लोगों से अपील की है कि वे अपने छोटे बच्चों को स्मार्टफोन न दें। उन्होंने कहा कि इससे बच्चों में डिप्रेशन हो सकता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को गोरखपुर महोत्सव में हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कई मुद्दों पर बात की। सीएम योगी ने कहा कि लोग बहुत छोटे बच्चों को स्मार्टफोन दे रहे हैं। उन्होंने उनसे ऐसा न करने का आग्रह किया, नहीं तो बच्चा डिप्रेशन में चला जाएगा। उन्होंने उन्हें इसके बजाय अपने बच्चों को पढ़ना-लिखना सिखाने की सलाह दी। उन्होंने लोगों से बाइक या कार चलाते समय अपने मोबाइल फोन को साइलेंट मोड पर रखने की भी अपील की। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि सड़क सुरक्षा एक चुनौती है। अच्छी सड़कें आपको जल्दी मंज़िल तक पहुँचाने के लिए होती हैं, न कि ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने के लिए। गाड़ी चलाते समय ईयरफोन पहनने की कोई ज़रूरत नहीं है। सीएम योगी ने साइबर क्राइम के मुद्दे पर भी बात की। उन्होंने कहा कि हमें धोखेबाजों के जाल में फंसने से बचना चाहिए। जब भी हम शॉर्टकट अपनाकर फायदा कमाने की कोशिश करते हैं, तो हम साइबर क्राइम के शिकार हो जाते हैं। इन धोखेबाजों से खुद को बचाने के लिए हमें खुद सतर्क रहना होगा।
गोरखपुर महोत्सव में विपक्ष की कड़ी आलोचना
गोरखपुर महोत्सव में विपक्ष पर निशाना साधते हुए सीएम योगी ने कहा कि गोरखपुर का रामगढ़ ताल कभी अपराधियों का अड्डा माना जाता था, लेकिन आज यह पर्यटन का केंद्र बन गया है। अब कोई भी गोरखपुर की उपेक्षा नहीं करता। यही बदलाव है। उन्होंने इंसेफेलाइटिस के खिलाफ आंदोलन का ज़िक्र किया, और बताया कि कैसे उनकी सरकार आने के बाद उन्होंने दो साल के अंदर इसे खत्म कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने राज्य को माफिया-मुक्त और दंगा-मुक्त बनाया है। उन्होंने एक निडर माहौल दिया है। अब कोई भी लड़की सुरक्षित रूप से स्कूल या बाज़ार जा सकती है। अगर कोई गुंडा बदतमीज़ी करने की हिम्मत करेगा, तो उसे अगले चौराहे पर ही उसका अंजाम भुगतना पड़ेगा।
गोरखपुर के विकास के लिए बहुत काम हुआ
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले, और जब वह सीएम बने, तो सबसे ज़्यादा शिकायतें राशन वितरण को लेकर थीं। उन्होंने टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके इस समस्या को हल किया। गोरखपुर विकास की दौड़ में पीछे रह गया था। अगर हम 2017 से पहले के गोरखपुर की तुलना आज के गोरखपुर से करें, तो फर्क दिन-रात का है।
सीएम योगी ने कहा कि गोरखपुर पहले उपेक्षित था, असुरक्षित था, गुंडागर्दी और वसूली से परेशान था, और बिजली की कमी थी। बीमारियाँ भी बहुत ज़्यादा थीं। यह इलाका माफिया एक्टिविटी और गुंडागर्दी के लिए बदनाम हो गया था। पूरा राज्य भी ऐसी ही हालत में था। अराजकता अपने चरम पर थी। न तो व्यापारी सुरक्षित थे और न ही महिलाएं। जबरन वसूली रैकेट और एन्सेफलाइटिस से मौतें हो रही थीं। युवा लोग पलायन कर रहे थे। जो कोई 8 या 10 साल पहले गोरखपुर आया होगा, वह आज उसे पहचान नहीं पाएगा। अयोध्या में भी ऐसा ही बदलाव हुआ है। वाराणसी आने वाला कोई भी व्यक्ति उसे पहचान नहीं पाएगा। प्रयागराज भी पहचानने लायक नहीं रहा। लखनऊ भी पूरी तरह से अलग है; पहले यह बहुत गंदा था, और लोगों को सूरज डूबने के बाद घर से बाहर न निकलने की सलाह दी जाती थी, लेकिन अब कोई डर नहीं है। उत्तर प्रदेश बाकी भारत के साथ तरक्की कर रहा है।