नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP)—खासकर अजित पवार गुट—के अंदरूनी मतभेद अब खुलकर सामने आ रहे हैं। सहयोगी पार्टियों ने इस मामले पर सावधानीपूर्वक चुप्पी साधे रखी है और इसे NCP का अंदरूनी मामला बताया है।
अजित पवार के NCP गुट में अंदरूनी कलह तेज़ी से साफ़ दिख रही है। एक तरफ सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार का खेमा है, तो दूसरी तरफ सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल के नेतृत्व वाला गुट है। सवाल यह उठता है कि क्या यह झगड़ा सिर्फ़ संगठन पर कंट्रोल और पदों के लिए है, या इसका संबंध शरद पवार गुट के साथ विलय की चल रही चर्चाओं से है?
विवाद कैसे शुरू हुआ?
विवाद तब शुरू हुआ जब सुनेत्रा पवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की प्रक्रिया को चुनौती दी गई। अब, पार्टी के एक कार्यकर्ता ने महाराष्ट्र राज्य अध्यक्ष के तौर पर सुनील तटकरे की नियुक्ति को लेकर चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि तटकरे ने तय प्रक्रिया का पालन किए बिना, अपना कार्यकाल खत्म होने से लगभग छह महीने पहले ही खुद को राज्य अध्यक्ष के तौर पर फिर से चुन लिया।
अजित पवार के नेतृत्व वाले NCP गुट के नेता भाऊसाहेब दत्ताराव पाटिल गोरे का दावा है कि राज्य अध्यक्ष का चुनाव पूरी तरह से गैर-कानूनी था, क्योंकि न तो चुनाव का कोई शेड्यूल घोषित किया गया था और न ही नॉमिनेशन और वोटिंग के लिए कोई तारीख तय की गई थी। उनके मुताबिक, तटकरे का कार्यकाल जुलाई में खत्म होने वाला था, फिर भी उन्होंने फरवरी में ही खुद को राज्य अध्यक्ष के तौर पर फिर से चुन लिया—उसी अधिवेशन में जिसमें सुनेत्रा पवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया था।
NCP के विलय को लेकर अटकलें तेज़
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब अजित पवार गुट और शरद पवार गुट के बीच विलय की अटकलों ने फिर से ज़ोर पकड़ लिया है। शरद पवार, पार्थ पवार और प्रफुल्ल पटेल के बीच हालिया मुलाकातों ने इन चर्चाओं को और हवा दी है। इसके अलावा, ऐसी खबरें भी हैं कि 'महायुति' खेमे के कुछ विधायक शरद पवार के संपर्क में हैं, जिससे राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। ऐसे में, अगर विलय या किसी तरह का पुनर्गठन होता है, तो पार्टी संगठन की कमान किसके हाथ में होगी, यह सवाल अहम हो जाता है।
NCP नेता क्या कह रहे हैं? हालांकि, NCP के अजित पवार गुट के नेता और मंत्री लगातार दावा कर रहे हैं कि पार्टी में सब कुछ ठीक है और सभी नेता सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में एकजुट होकर काम कर रहे हैं। NCP नेता और कैबिनेट मंत्री बाबासाहेब पाटिल ने कहा, "हमारी पार्टी में कोई अंदरूनी कलह नहीं है। सब मिलकर काम कर रहे हैं। हम अपनी पार्टी प्रमुख और डिप्टी CM सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में काम कर रहे हैं। चुनाव आयोग तय करेगा कि सुनील तटकरे की राज्य अध्यक्ष के तौर पर नियुक्ति सही है या नहीं।"
**सहयोगी दल चुप हैं**
महायुति गठबंधन में शामिल सहयोगी दल NCP की अंदरूनी कलह और विवादों पर चुप हैं और कोई खास टिप्पणी करने से बच रहे हैं। शिवसेना मंत्री संजय शिरसाट ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि यह NCP का अंदरूनी मामला है। उन्होंने कहा कि यह तय करना पार्टी नेतृत्व का काम है कि प्रक्रिया संवैधानिक थी या नहीं। पार्टी नेतृत्व शिकायतों को सुनेगा और सही फैसला लेगा। सहयोगियों की इस सावधानी भरी चुप्पी से कई सवाल भी उठ रहे हैं।
**विवाद पार्टी संगठन से आगे बढ़ा**
पवार परिवार में उत्तराधिकार की यह लड़ाई अब सिर्फ पार्टी संगठन तक सीमित नहीं रही है। इसका असर महायुति की राजनीति और शरद पवार गुट के साथ विलय पर चल रही बातचीत पर भी पड़ सकता है। अब सबकी नज़रें चुनाव आयोग के रुख और NCP नेतृत्व के अगले कदम पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि पार्टी की कमान किसके हाथ में होगी और क्या पवार परिवार के बीच राजनीतिक मतभेदों को दूर करने की कोई गुंजाइश है।