नई दिल्ली । बिहार के सीएम और जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष नीतीश कुमार ने एक बार फिर अरुणाचल में अपना उम्मीदवार उतारकर कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नितीश कुमार ने हफ्ते भर के अंदर दूसरी बार ऐसा सिग्नल दिया है, जिससे कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। बता दें कि इंडिया अलायंस में अभी 28 सहयोगी दलों के बीच लोकसभा चुनाव के लिए सीटों का बंटवारा नहीं हुआ है, बावजूद इसके उनकी अध्यक्षता वाली जेडीयू ने अरुणाचल प्रदेश की एक लोकसभा सीट से अपने उम्मीदवार का ऐलान कर दिया है। इस एकतरफा फैसले ने कांग्रेस को आश्चर्यचकित कर दिया है और इससे इंडिया अलायंस में खलबली मच गई है। 2019 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार दूसरे नंबर पर रहे थे।
इस मामले में जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्वोत्तर क्षेत्र के प्रभारी अफाक अहमद खान ने कहा कि उनकी पार्टी की अरुणाचल इकाई की अध्यक्ष रूही तागुंग अरुणाचल पश्चिम सीट से अगला लोकसभा चुनाव लड़ेंगी। खान ने यह भी कहा कि यह घोषणा पार्टी अध्यक्ष नीतीश कुमार के निर्देश पर की गई है। इंडिया गठबंधन के घटक दलों के बीच सीट बंटवारा नहीं हुआ है, लेकिन नीतीश कुमार द्वारा दो कदम आगे बढ़ाकर अरुणाचल में कैंडिडेट उतारने के सियासी कदम को प्रेशर टैक्टिक समझा जा रहा है। उन्होंने यह कदम तब बढ़ाया है, जब नीतीश के इंडिया गठबंधन से नाराजगी की चर्चा हो रही है।
गौरतलब है कि अरुणाचल प्रदेश में दो लोकसभा सीटें हैं, अरुणाचल पश्चिम और अरुणाचल पूर्व। सबसे पुरानी पार्टी होने की वजह से दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में कांग्रेस का यहां मजबूत समर्थन है। पार्टी दोनों सीटों पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही थी, तभी जेडीयू ने ऐसा कर के कांग्रेस को चिंता में डाल दिया है। बता दें कि अरुणाचल पश्चिम सीट फिलहाल भाजपा के केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के पास है, जिन्होंने 2019 में अरुणाचल कांग्रेस अध्यक्ष नबाम तुकी को हराया था। हालांकि पिछले सप्ताह ही जेडीयू अध्यक्ष पद से राजीव रंजन उर्फ लल्लन सिंह को हटाकर नीतीश ने खुद पार्टी की कमान संभाल ली थी।