मुंबई । हाजी मलंग दरगाह में 20 हजार शिवसैनिकों समेत उद्धव ठाकरे समेत ने पूजा की है। महारास्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे अब इस दरगाह को मंदिर बनाने चाहते हैं। ये मस्जिद मस्जिद नहीं मंदिर है इस तरह की आवाजें लगातार सुनाई पड़ती रहीं हैं। पर अब एक दरगाह को लेकर बवाल मच गया है। फिलहाल ये जंग तो जुबानी है, लेकिन मामला तूल पकड़ता जा रहा है। 2 जनवरी को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के एक बयान के बाद बरसों पुरानी हाजी मलंग दरगाह चर्चा में आ गई है। एकनाथ सिंदे ने मंगलवार को कह दिया कि वह दरगाह की मुक्ति के लिए प्रतिबद्ध हैं।
दरगाह के जो ट्रस्टी हैं उन्होंने कहा कि यह सब विवाद दरगाह का इस्तामाल कर राजनीतिक फायदा लेने के लिये किया जा रहा है। शिवसेना वैसे तो दो खेमों में बंट गई है, लेकिन पहले जब पार्टी एक थी तो यह उसका साझा विचार था। विचार था कि हाजी मलंग दरगाह एक मंदिर है। मलंगगढ़ किले के पास मौजूद इस दरगाह का सबसे बड़ा विरोध हाल के दशक में साल 1980 में हुआ था। तब शिवसेना नेता आनंद दिघे ने यह कहना शुरू किया कि वे इस दरगाह को प्राचीन हिंदू मंदिर के तौर पर मान्यता दिला कर ही दम लेंगे।
जिस दरगाह को मंदिर बनाने को लेकर एकनाथ शिंदे अब खैर-ख्वाह बन रहे हैं उससे उद्धव ठाकरे का एक पुराना कनेक्शन है। साल 1996 में आनंद दिघे का संघर्ष जोड़ पकड़ने लगा था। दावा हो रहा था कि यह दरगाह 700 साल पुराना मंदिर है। फिर एक दिन शिवसैनिकों ने तय किया कि वे दरगाह पर पहुंच कर पूजा करेंगे। करीब 20 हजार शिवसैनिक दरगाह पर पूजा करने के लिए गए। मनोहर जोशी उस समय राज्य के मुख्यमंत्री हुआ करते थे। लोगों को याद है जब मुख्यमंत्री के साथ 20 हजार सैनिकों ने दरगाह में पूजा की थी कि उस समूह में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे भी शामिल थे।