कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने पीएम मोदी की "इंटलेक्चुअल नक्सल" (बौद्धिक नक्सल) वाली टिप्पणी का जवाब दिया है। चिदंबरम ने कहा, "मुझे 'इंटलेक्चुअल नक्सल' होने पर गर्व है।"
वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की "इंटलेक्चुअल नक्सल" वाली टिप्पणी पर पलटवार किया। तंज कसते हुए उन्होंने कहा, "मुझे 'इंटलेक्चुअल नक्सल' होने पर गर्व है।" चिदंबरम की यह प्रतिक्रिया प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण के बाद आई है। लाल किले से अपने भाषण में, पीएम मोदी ने देश से उन लोगों के प्रति सावधान रहने का आग्रह किया था जिन्हें उन्होंने "इंटलेक्चुअल नक्सल" बताया था।
अपने संबोधन में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश ने जंगलों में हथियार उठाने वाले नक्सलवाद और माओवाद के खिलाफ लड़ाई में बड़ी सफलता हासिल की है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि "इंटलेक्चुअल नक्सल" अभी भी मौजूद हैं और लगातार मौके की तलाश में रहते हैं। पीएम मोदी ने लोगों से ऐसे तत्वों की पहचान करने और उन्हें अलग-थलग करने की अपील की। उन्होंने जोर दिया कि देश को इस चुनौती को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
चिदंबरम ने पलटवार क्यों किया?
प्रधानमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए, पी. चिदंबरम ने कहा कि उन्हें "इंटलेक्चुअल नक्सल" कहलाने पर गर्व है। उनका बयान केंद्र सरकार की नीतियों और प्रधानमंत्री की राजनीतिक बयानबाजी के प्रति कांग्रेस पार्टी के विरोध को दर्शाता है। कांग्रेस ने पहले भी प्रधानमंत्री द्वारा "अर्बन नक्सल" और अब "इंटलेक्चुअल नक्सल" जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि सरकार अपने आलोचकों को इस तरह के लेबल लगाकर निशाना बनाती है।
"इंटलेक्चुअल नक्सल" पर राजनीतिक बहस तेज
प्रधानमंत्री के बयान के बाद, इस मुद्दे पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। जहां सरकार ऐसी विचारधाराओं को राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक सद्भाव के लिए खतरा मानती है, वहीं विपक्ष इसे सरकार के आलोचकों को निशाना बनाने की कोशिश के तौर पर देखता है।